सूक्ति : " हिंदी भारत के लिए प्रकृति का वरदान है." -- गिरिधर शर्मा
अनुवाद : स्वरुप तथा प्रक्रिया
अनुवाद के कई रूप है :-
- शब्दानुवाद
- भावानुवाद
- सारानुवाद
- भाष्य
- रूपांतरण
Kasangande के अनुसार अनुवाद ४ प्रकार के है.--
- भाषापरक
- तथ्यपरक
- संस्कृति परक
- सोंद्रियपरक
अनुवाद में निम्नांकित प्रक्रियाए शामिल है:
- स्रोत भाषा का गंभीरता पूर्वक पठन तथा विश्लेषण
- स्रोत भाषा के वाक्यों का लघु खंडो में विभाजन
- लघु खंडो का लक्ष्य भाषा में अनुवाद के लिए स्वाभाविक समानार्थी शब्दों का चयन तथा अंतरण
- वाक्यों के विन्यास ; शब्दों, व्याकरण का सही प्रयोग दुवारा पुनर्रचना या पुनर्गठन
- अंत में , पुनरीक्षण
पुनरीक्षण के दौरान स्वयं से पूछे की -
- क्या मूल भाषा में व्यक्त भाव या विचार आया है ?
- क्या अनुवाद में शब्दों का सटीक पर्याय दिया गया है?
अनुवाद में सफलता के लिए सतत अभ्यास अनिवार्य है.
धन्यवाद